हिन्दी में धर्मग्रन्थ
यह खण्ड उन धर्मग्रन्थों और प्रार्थनाओं का निःशुल्क संग्रह है जिन्हें हिन्दी बोलने वाले लोग पढ़ते, सुनते और गाते हैं। हर पृष्ठ पर ग्रन्थ का मूल पाठ है और साथ में हिन्दी में हमारी अपनी लिखी व्याख्या। अभी हिन्दू धर्म के दो पाठ प्रकाशित हैं, रामचरितमानस का मंगलाचरण और पूरी हनुमान चालीसा; दूसरे धर्मों के पृष्ठ आगे जुड़ेंगे।
- लिखा गया
यह संग्रह क्या है
धर्मग्रन्थ पढ़ने वाले बहुत-से लोग दो चीज़ें साथ-साथ चाहते हैं: ग्रन्थ के असली शब्द, और उन शब्दों का अर्थ उस भाषा में जिसमें वे सोचते हैं। यह संग्रह इसी ज़रूरत को ध्यान में रखकर बना है। यहाँ हर ग्रन्थ अपने मूल रूप में है, और साथ में हिन्दी में उसकी पृष्ठभूमि, हर छन्द का अर्थ और आम सवालों के जवाब।
संग्रह भाषा के हिसाब से बँटा है। हिन्दी खण्ड में उन्हीं धर्मों को जगह दी गई है जिनके ग्रन्थ हिन्दी-भाषी लोग सचमुच पढ़ते या सुनते हैं। हर धर्म का अपना पृष्ठ है, और उसके भीतर उस धर्म के अलग-अलग ग्रन्थों के पृष्ठ।
हिन्दी में किन धर्मों के ग्रन्थ पढ़े जाते हैं
हिन्दी बोलने वाला समाज कई धर्मों का घर है, और हर धर्म का हिन्दी से रिश्ता अलग तरह का है। किसी के ग्रन्थ हिन्दी की ही बोलियों में रचे गए, तो किसी के ग्रन्थ दूसरी भाषा में हैं पर उनके अनुवाद, प्रवचन और व्याख्याएँ हिन्दी में चलती हैं।
इस संग्रह में हिन्दी के लिए छह धर्म रखे गए हैं। इन सभी के मानने वालों में ऐसे बहुत-से लोग हैं जो अपने ग्रन्थ हिन्दी के सहारे पढ़ते या समझते हैं, चाहे मूल पाठ किसी भी भाषा में हो।
- हिन्दू धर्म
- रामचरितमानस और हनुमान चालीसा अवधी में हैं और सूरदास के पद ब्रजभाषा में; दोनों बोलियाँ हिन्दी के बड़े परिवार में गिनी जाती हैं। भगवद्गीता जैसे संस्कृत ग्रन्थ हिन्दी अनुवाद के साथ पढ़े जाते हैं।
- बौद्ध धर्म
- बुद्ध ने ज़्यादातर उपदेश आज के बिहार और उत्तर प्रदेश में दिए। पालि और संस्कृत में सुरक्षित उनके उपदेश, जैसे धम्मपद, हिन्दी अनुवादों में खूब पढ़े जाते हैं।
- जैन धर्म
- जैन आगम प्राकृत में हैं और कई ग्रन्थ संस्कृत में, पर उत्तर और मध्य भारत के जैन समाज में स्वाध्याय और प्रवचन बड़े पैमाने पर हिन्दी में होते हैं।
- सिख धर्म
- गुरु ग्रन्थ साहिब गुरमुखी लिपि में है, पर उसकी भाषा में ब्रज और सन्तों की साझी भाषा के रूप भी हैं, और उसमें कबीर, रविदास और नामदेव की बाणी शामिल है। इसके देवनागरी संस्करण भी छपते हैं।
- ईसाई धर्म
- हिन्दी में बाइबिल के अनुवाद उन्नीसवीं सदी से छपते आ रहे हैं, और उत्तर भारत के बहुत-से चर्चों में प्रार्थना और उपदेश हिन्दी में होते हैं।
- इस्लाम
- क़ुरआन का पाठ अरबी में होता है, पर उसका अर्थ समझने के लिए हिन्दी अनुवाद भी पढ़े जाते हैं, और बहुत-से लोग धार्मिक साहित्य हिन्दी और उर्दू दोनों में पढ़ते हैं।
अभी क्या प्रकाशित है
शुरुआत हिन्दू धर्म से हुई है, क्योंकि हिन्दी-भाषी घरों में सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले पाठों में से दो, रामचरितमानस और हनुमान चालीसा, खुद हिन्दी की एक बोली, अवधी, में हैं। दोनों गोस्वामी तुलसीदास से जुड़े हैं।
रामायण वाले पृष्ठ पर रामचरितमानस के बालकाण्ड का मंगलाचरण है: संस्कृत के दो श्लोक, अवधी के पाँच सोरठे और पहली चौपाई, हर छन्द के अर्थ के साथ। हनुमान चालीसा वाले पृष्ठ पर चालीसा के पूरे तैंतालीस छन्द हैं, यानी आरम्भ के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अन्त का दोहा।
बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई और इस्लाम के पृष्ठ अभी तैयार नहीं हैं, इसलिए धर्मों की सूची में ये 'अभी प्रकाशित नहीं' के साथ दिखते हैं। इन्हें एक-एक करके जोड़ा जाएगा, इस शर्त के साथ कि हर पाठ किसी सार्वजनिक संस्करण से मिलाया जा सके।
कुछ धर्मों के ग्रन्थ हिन्दी में क्यों नहीं हैं
इस संग्रह में कोई धर्म किसी भाषा के खण्ड में तभी रखा जाता है, जब उस धर्म के लोग अपने ग्रन्थ सचमुच उस भाषा में पढ़ते हों। इसी कारण यहूदी, ताओ, पारसी और शिन्तो परम्पराओं के ग्रन्थ हिन्दी खण्ड में नहीं हैं।
यहूदी समुदाय तोरा और अपनी प्रार्थनाएँ मुख्य रूप से हिब्रू में पढ़ता है। ताओ धर्म के ग्रन्थ चीनी भाषा में हैं और उसी में पढ़े जाते हैं। भारत के पारसी अपनी प्रार्थनाएँ अवेस्ता भाषा में करते हैं और उनका अर्थ प्रायः गुजराती या अंग्रेज़ी में समझते हैं। शिन्तो परम्परा के पाठ जापानी में हैं।
इन ग्रन्थों के हिन्दी अनुवाद देना सम्भव था, पर हमारा उद्देश्य वह दिखाना है जो लोग असल में पढ़ते हैं। ये ग्रन्थ उन भाषाओं के खण्डों में रखे जाएँगे जिनमें इनके समुदाय इन्हें पढ़ते हैं।
हर पृष्ठ पर क्या मिलेगा
हर ग्रन्थ के पृष्ठ की बनावट एक जैसी है, ताकि पढ़ने वाला जल्दी अपनी ज़रूरत की चीज़ तक पहुँच सके।
मूल पाठ हमेशा ग्रन्थ की अपनी भाषा में रहता है; हिन्दी में उसकी व्याख्या होती है, अनुवाद मूल शब्दों की जगह नहीं लेता।
- मूल पाठ
- ग्रन्थ अपनी भाषा और लिपि में, हर छन्द के क्रमांक के साथ।
- हर छन्द का अर्थ
- सरल हिन्दी में भाव, कठिन शब्दों के अर्थ और जुड़ी हुई कथा का संकेत।
- पृष्ठभूमि
- ग्रन्थ किसने और कब रचा, उसकी बनावट और पाठ की परम्पराएँ।
- संस्करण और स्रोत
- पाठ किस सार्वजनिक संस्करण से मिलाया गया और वह कहाँ उपलब्ध है।
पाठ कैसे चुना और जाँचा जाता है
यहाँ केवल सार्वजनिक (पब्लिक डोमेन) संस्करणों का पाठ छपता है, यानी ऐसे संस्करण जिन पर अब कॉपीराइट नहीं है। हर पंक्ति उस संस्करण से मिलाई जाती है और वर्तनी वैसी ही रखी जाती है जैसी उसमें छपी है; केवल स्कैन की साफ़ ग़लतियाँ सुधारी जाती हैं।
इसलिए कहीं-कहीं पाठ आपके घर की पोथी या गुटके से थोड़ा अलग दिख सकता है; जाने-माने अन्तरों का ज़िक्र पृष्ठ पर है। जहाँ स्कैन बिना सन्देह के नहीं पढ़ा जा सका, वहाँ हम आगे की पंक्तियाँ छापने के बजाय रुक गए हैं।
सारे अर्थ और लेख हमारे अपने शब्दों में हैं; किसी आधुनिक अनुवाद या टीका से वाक्य नहीं लिए गए। मान्यताओं को मान्यता और कथाओं को कथा के रूप में लिखा गया है, और टीकाकारों के मतभेद भी बताए गए हैं।
इस संग्रह का उपयोग कैसे करें
अगर आप नियमित पाठ करते हैं, तो मूल पंक्तियाँ पढ़ते हुए साथ दिया अर्थ देख सकते हैं; इससे अवधी या संस्कृत के कठिन शब्द धीरे-धीरे परिचित लगने लगते हैं। अगर आप किसी ग्रन्थ से पहली बार मिल रहे हैं, तो पहले पृष्ठभूमि वाला हिस्सा पढ़ना आसान रहेगा।
जहाँ कोई ग्रन्थ दूसरी भाषाओं में भी उपलब्ध होगा, वहाँ पृष्ठ पर 'अन्य भाषाओं में' के साथ उसकी कड़ी मिलेगी, ताकि आप वही पाठ किसी दूसरी भाषा की व्याख्या के साथ भी पढ़ सकें।
हिन्दी में पढ़े जाने वाले धर्म
- हिन्दू धर्महिन्दी में हिन्दू धर्मग्रन्थ: तुलसीदास के रामचरितमानस का मंगलाचरण और पूरी हनुमान चालीसा, मूल पाठ, सरल अर्थ और पाठ की परम्पराओं की जानकारी के साथ।पढ़ें
- बौद्ध धर्मअभी प्रकाशित नहीं
- जैन धर्मअभी प्रकाशित नहीं
- सिख धर्मअभी प्रकाशित नहीं
- ईसाई धर्मअभी प्रकाशित नहीं
- इस्लामअभी प्रकाशित नहीं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इस संग्रह को पढ़ने का कोई शुल्क है?
नहीं। सभी पृष्ठ निःशुल्क पढ़े जा सकते हैं। पाठ सार्वजनिक संस्करणों से लिए गए हैं और व्याख्याएँ हमारी अपनी लिखी हैं।
यहाँ का पाठ किस संस्करण से लिया गया है?
हर ग्रन्थ के पृष्ठ पर संस्करण का नाम मुख्य शीर्षक के नीचे और स्रोतों की सूची में दिया गया है। रामचरितमानस का पाठ बेलवेडियर प्रेस, प्रयाग के संस्करण से और हनुमान चालीसा का पाठ अंग्रेज़ी विकिपीडिया के दिसम्बर २०१३ के एक संस्करण से मिलाया गया है।
क्या अर्थ किसी प्रकाशित टीका से लिए गए हैं?
नहीं। अर्थ और लेख हमने अपने शब्दों में लिखे हैं, किसी आधुनिक अनुवाद या टीका को दोहराया नहीं गया है। जहाँ टीकाकार किसी पंक्ति का अर्थ अलग-अलग करते हैं, वहाँ यह बात संक्षेप में बताई गई है।
बाकी धर्मों के ग्रन्थ हिन्दी में कब आएँगे?
बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई और इस्लाम के पृष्ठ आगे जोड़े जाएँगे, पर अभी कोई तारीख़ तय नहीं है। कोई भी पाठ तभी छपेगा जब उसे किसी सार्वजनिक संस्करण से पंक्ति-दर-पंक्ति मिलाया जा सके।
यहूदी, ताओ, पारसी और शिन्तो ग्रन्थ हिन्दी में क्यों नहीं हैं?
क्योंकि इनके समुदाय अपने ग्रन्थ मुख्य रूप से दूसरी भाषाओं में पढ़ते हैं: यहूदी हिब्रू में, ताओ परम्परा के लोग चीनी में, पारसी अवेस्ता में (अर्थ गुजराती या अंग्रेज़ी में), और शिन्तो परम्परा के लोग जापानी में।