हिन्दू धर्मग्रन्थ हिन्दी में

यहाँ हिन्दू परम्परा के वे पाठ हैं जो हिन्दी-भाषी घरों और मन्दिरों में खूब पढ़े और गाए जाते हैं, मूल पाठ और हमारी अपनी व्याख्या के साथ। अभी इस खण्ड में गोस्वामी तुलसीदास से जुड़े दो पाठ हैं: रामायण, यानी रामचरितमानस का मंगलाचरण, और पूरी हनुमान चालीसा।

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इस संग्रह के ग्रन्थ

हिन्दू ग्रन्थों की परम्परा

हिन्दू धर्म का कोई एक ग्रन्थ नहीं है, बल्कि हज़ारों वर्षों में बनी ग्रन्थों की एक लम्बी परम्परा है। वेद और उपनिषद संस्कृत में हैं, और परम्परा इन्हें 'श्रुति' कहती है, यानी सुना हुआ ज्ञान। रामायण, महाभारत, जिसका एक हिस्सा भगवद्गीता है, और पुराण 'स्मृति' की बड़ी श्रेणी में गिने जाते हैं।

मध्यकाल में भक्ति आन्दोलन के सन्तों और कवियों ने धर्म की बात लोगों की अपनी बोलियों में कहनी शुरू की। उत्तर भारत में तुलसीदास ने अवधी में और सूरदास ने ब्रजभाषा में रचना की। इससे राम और कृष्ण की कथाएँ उन लोगों तक भी पहुँचीं जो संस्कृत नहीं पढ़ सकते थे।

हिन्दी-भाषी घरों में क्या पढ़ा जाता है

हिन्दी-भाषी इलाक़ों में रामचरितमानस शायद सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला धार्मिक ग्रन्थ है, जिसे लोग आम तौर पर 'रामायण' ही कहते हैं। हनुमान चालीसा उतनी ही जानी-पहचानी प्रार्थना है, जिसे बहुत-से लोग बचपन में ही याद कर लेते हैं।

इनके अलावा भगवद्गीता संस्कृत में पढ़ी जाती है और उसका अर्थ हिन्दी में, नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है, और घरों में आरतियाँ, अलग-अलग देवताओं की चालीसाएँ और व्रत-कथाएँ चलती हैं। इनमें से कुछ रचनाएँ संस्कृत में हैं, तो कई अवधी, ब्रज या आज की हिन्दी में।

बहुत-से परिवारों में ये पाठ किताब से कम और सुनकर ज़्यादा सीखे जाते हैं: बच्चे दादा-दादी या माता-पिता के साथ बैठकर चालीसा और आरती याद कर लेते हैं, और छपे हुए गुटके घर के पूजा-स्थान पर रखे रहते हैं।

तुलसीदास और अवधी

गोस्वामी तुलसीदास सोलहवीं-सत्रहवीं सदी के कवि थे। उनके जन्म के वर्ष और स्थान पर विद्वानों में मतभेद है, पर माना जाता है कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा काशी में बिताया और वहीं सन् १६२३ में उनका देहान्त हुआ। रामचरितमानस के अलावा विनय पत्रिका, कवितावली और गीतावली उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

अवधी अवध क्षेत्र की बोली है, जिसमें अयोध्या और लखनऊ आते हैं। आज की मानक हिन्दी से यह कुछ अलग है; 'बन्दउँ' (वन्दना करता हूँ), 'जासु' (जिसका) और 'तासु' (उसका) जैसे रूप शुरू में अटपटे लग सकते हैं। पर थोड़ी मदद मिले तो हिन्दी पढ़ने वाला अवधी जल्दी समझने लगता है, और इस संग्रह के अर्थ इसी के लिए हैं।

पाठ और गायन की परम्परा

हिन्दू घरों में ये ग्रन्थ केवल चुपचाप पढ़े नहीं जाते; इनका पाठ होता है, यानी बोलकर या गाकर पढ़ना। बहुत-से लोग रोज़ सुबह या शाम मानस के कुछ दोहे या हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, और मंगलवार व शनिवार को हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ ख़ास तौर पर होता है।

बड़े अवसरों पर पूरा रामचरितमानस पढ़ा जाता है: नौ दिन का नवाह्न पारायण, महीने भर का मास पारायण, या बिना रुके चलने वाला अखण्ड पाठ। रामलीला, कथा-प्रवचन और भजन-मण्डलियाँ भी इन ग्रन्थों को लोगों तक पहुँचाती हैं, और ढोलक, मँजीरे और हारमोनियम के साथ मानस का सामूहिक गायन कई गाँवों और मोहल्लों में आम है।

उन्नीसवीं सदी में गिरमिटिया मज़दूरों के साथ रामचरितमानस मॉरिशस, फ़िजी, त्रिनिदाद, सूरीनाम और गयाना जैसे देशों तक पहुँचा, और वहाँ के भारतीय मूल के समुदायों में आज भी इसका पाठ होता है।

इस संग्रह में क्या है

रामायण (रामचरितमानस) वाले पृष्ठ पर बालकाण्ड का मंगलाचरण है: पहला और सातवाँ संस्कृत श्लोक, अवधी के पाँच सोरठे और पहली चौपाई। साथ के लेख में मानस और वाल्मीकि रामायण का सम्बन्ध, सात काण्ड, मानस के छन्द और पाठ की परम्पराएँ समझाई गई हैं।

हनुमान चालीसा वाले पृष्ठ पर चालीसा के पूरे तैंतालीस छन्द हैं, हर एक के अर्थ के साथ। लेख में चालीसा की बनावट, हनुमान के नाम, पाठ के अवसर, पाठ-भेद और चालीसा में आई कथाएँ हैं।

इस संग्रह को कैसे पढ़ें

हर छन्द के साथ उसका नाम और क्रमांक लिखा है, जैसे 'सोरठा ३' या 'चौपाई २८', ताकि आप किसी ख़ास पंक्ति को आसानी से ढूँढ सकें। मूल पाठ और हमारी व्याख्या अलग-अलग रखे गए हैं, ताकि पाठ करते समय ध्यान मूल शब्दों पर रहे और ज़रूरत हो तो अर्थ देखा जा सके।

पाठ की वर्तनी उस सार्वजनिक संस्करण के अनुसार है जिससे उसे मिलाया गया है, इसलिए आपके घर के गुटके से कहीं-कहीं अन्तर दिख सकता है। सामूहिक पाठ में लोग प्रायः अपने मन्दिर या परिवार में चलने वाला रूप ही पढ़ते हैं; यहाँ का पाठ समझने और मिलान करने में मदद के लिए है।

आगे इस खण्ड में रामचरितमानस के और अंश तथा दूसरे लोकप्रिय पाठ जोड़े जाएँगे, पर तभी जब उन्हें किसी सार्वजनिक संस्करण से पूरी तरह मिलाया जा सके।

इस संग्रह के ग्रन्थ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रामचरितमानस और रामायण एक ही ग्रन्थ हैं?

नहीं। मूल रामायण महर्षि वाल्मीकि का संस्कृत महाकाव्य है। रामचरितमानस तुलसीदास की अवधी में कही गई राम-कथा है, जो वाल्मीकि और दूसरे ग्रन्थों पर आधारित होते हुए भी एक स्वतन्त्र रचना है। उत्तर भारत में बोलचाल में मानस को ही 'रामायण' कहा जाता है।

रामचरितमानस और हनुमान चालीसा किस भाषा में हैं?

दोनों अवधी में हैं, जो हिन्दी की एक प्रमुख बोली है। रामचरितमानस के हर काण्ड के आरम्भ में कुछ श्लोक संस्कृत में भी हैं।

क्या यहाँ पूरा रामचरितमानस मिलेगा?

अभी नहीं। अभी बालकाण्ड का मंगलाचरण और पहली चौपाई दी गई है, क्योंकि हम वही पंक्तियाँ छापते हैं जो सार्वजनिक संस्करण से पूरी तरह मिलाई जा सकी हैं। हनुमान चालीसा यहाँ पूरी है।

यहाँ की व्याख्या किस टीका पर आधारित है?

किसी पर नहीं। अर्थ और लेख हमने अपने शब्दों में लिखे हैं। जहाँ परम्परागत टीकाकार किसी पंक्ति के अलग-अलग अर्थ करते हैं, वहाँ यह मतभेद संक्षेप में बताया गया है।

पाठ करने का कोई ख़ास नियम है?

नियम परिवार और सम्प्रदाय के हिसाब से अलग-अलग हैं। बहुत-से लोग नहा-धोकर, दीपक जलाकर और शान्त मन से पाठ करते हैं। अपने परिवार, मन्दिर या गुरु की परम्परा का पालन करना सबसे सहज रास्ता है।

रामचरितमानस और हनुमान चालीसा का आपस में क्या सम्बन्ध है?

परम्परा दोनों को तुलसीदास की रचना मानती है, हालाँकि कुछ विद्वान चालीसा के तुलसीदास की रचना होने पर सवाल उठाते हैं। चालीसा का पहला दोहा मानस के अयोध्याकाण्ड के आरम्भ में भी आता है, और मानस के सुन्दरकाण्ड के केन्द्र में हनुमान हैं। बहुत-से लोग दोनों का पाठ साथ-साथ करते हैं।